प्रेरक उदाहरण
जमाल अब्देल नासिर के सुधार
मिस्र · 1954–1970
विदेशी नियंत्रण से स्वेज नहर को आज़ाद कराया, ग़रीब किसानों में ज़मीन बाँटी और विशाल अस्वान बाँध बनाया, जिससे देश को बिजली, सिंचाई और अरब जगत में एक नया स्वाभिमान मिला।
राजनीतिक विचारधारा गाइड
विदेशी शोषण से आज़ादी पाने, देश के संसाधनों पर जनता का हक़ क़ायम करने और मेहनतकश लोगों की ज़िंदगी संवारने के लिए पूरे राष्ट्र को एकजुट करें।
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मुफ़्त क्विज़ शुरू करें →कल्पना कीजिए आपके इलाक़े की किसी कोयला खदान या तेल के कुएँ की, जो दशकों से किसी विदेशी कंपनी के हाथ में है। सारा मुनाफ़ा सात समंदर पार चला जाता है, जबकि स्थानीय मज़दूरों को मामूली दिहाड़ी मिलती है और इलाक़े के स्कूल और अस्पताल खस्ताहाल रहते हैं। एक वामपंथी राष्ट्रवादी कहेगा: यह दौलत हमारे अपने मुल्क की है। इन प्राकृतिक संसाधनों पर अपने देश का नियंत्रण हो, इसका मुनाफ़ा अपने बच्चों के स्कूलों और अस्पतालों पर लगे, और अपने नागरिकों को अपने देश में गरिमा मिले।
वामपंथी राष्ट्रवाद दो ऐसे विचारों को साथ लाता है जिन्हें अक्सर अलग समझा जाता है: मुल्क से बेपनाह प्यार और समाजवादी आर्थिक नीतियाँ। दक्षिणपंथी राष्ट्रवादियों के उलट, जो अक्सर धर्म, जाति या नस्ल के आधार पर देश को परिभाषित करते हैं, वामपंथी राष्ट्रवादी देश को उसके कामगार और किसान से पहचानते हैं। उनके लिए राष्ट्रीय संप्रभुता का मतलब अल्पसंख्यकों को दबाना नहीं, बल्कि विदेशी कंपनियों और साम्राज्यवाद के शोषण से देश को बचाना है।
भारत में 1969 में 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, जिससे हज़ारों नई बैंक शाखाएँ गाँवों तक पहुँचीं और किसानों व छोटे कारोबारियों को कर्ज़ मिला। मिस्र में जमाल अब्देल नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण किया और किसानों को ज़मीन दी। मेक्सिको ने 1938 में विदेशी तेल कंपनियों को अपने हाथ में लेकर सरकारी कंपनी पेमेक्स बनाई और राष्ट्रीय ऊर्जा पर अपना हक़ क़ायम किया।
एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका के स्वतंत्रता संग्रामों की यही विचारधारा थी। इसका मानना है कि जब तक देश के मेहनतकश लोगों का अपनी अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक राजनीतिक आज़ादी अधूरी है।
ideoMap के चार पैमानों पर इसकी आम जगह।
प्रेरक उदाहरण
मिस्र · 1954–1970
विदेशी नियंत्रण से स्वेज नहर को आज़ाद कराया, ग़रीब किसानों में ज़मीन बाँटी और विशाल अस्वान बाँध बनाया, जिससे देश को बिजली, सिंचाई और अरब जगत में एक नया स्वाभिमान मिला।
प्रेरक उदाहरण
भारत · 1969
सरकार ने 14 बड़े निजी बैंकों को सार्वजनिक हाथों में लिया, जिससे बैंकिंग सेवाएँ महानगरों से निकलकर सुदूर ग्रामीण भारत पहुँचीं और किसानों व छोटे उद्यमियों को सस्ता कर्ज़ मिलना शुरू हुआ।
प्रेरक उदाहरण
मेक्सिको · 1938
राष्ट्रपति लाज़ारो कार्देनास ने विदेशी तेल कंपनियों की संपत्तियों का अधिग्रहण कर सरकारी कंपनी पेमेक्स बनाई, जिसने पूरे देश को एकजुट किया और तेल की कमाई से राष्ट्रीय शिक्षा और सड़कों का विस्तार हुआ।
सबक़ देने वाला उदाहरण
पाकिस्तान · 1972–1977
देश और ग़रीबों के नाम पर सरकार ने बैंक, बड़े उद्योग और यहाँ तक कि आटा और चावल मिलें भी अपने क़ब्ज़े में ले लीं; निजी निवेश ठप हो गया और विकास धीमा पड़ गया।
सबक़ देने वाला उदाहरण
लीबिया · 1969–2011
तेल की दौलत से जनता को मुफ़्त सुविधाएँ दी गईं, लेकिन निजी दुकानों पर पाबंदी लगा दी गई, स्वतंत्र राजनीतिक बहस कुचल दी गई और विरोधियों को सरेआम फाँसी दी गई।
भगत सिंह
भारत · 1907–1931
महान क्रांतिकारी जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ आज़ादी की लड़ाई को मार्क्सवादी समाजवाद के साथ जोड़ा और साफ़ कहा कि आज़ादी का मतलब एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान के शोषण का अंत होना चाहिए।
सुभाष चंद्र बोस
भारत · 1897–1945
'आज़ाद हिंद फ़ौज' बनाकर अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ सैन्य मोर्चा खोलने वाले 'नेताजी', जिन्होंने नियोजित समाजवादी अर्थव्यवस्था और सभी धर्मों व जातियों की अटूट राष्ट्रीय एकता का सपना देखा।
जमाल अब्देल नासिर
मिस्र · 1918–1970
मिस्र के राष्ट्रपति जिन्होंने अरब समाजवाद, गुटनिरपेक्ष आंदोलन और राष्ट्रीय गरिमा की मशाल जलाई, स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण किया और तीसरी दुनिया के उपनिवेश-विरोधी प्रतीक बने।
हाँ। यूरोप में राष्ट्रवाद को अक्सर संकीर्ण और दक्षिणपंथी नज़रिए से देखा गया है, लेकिन एशिया, अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका के ग़ुलाम देशों में राष्ट्रवाद की धारा मुख्यतः वामपंथी रही। वहाँ राष्ट्रवाद का मक़सद किसी दूसरे देश पर हमला करना नहीं, बल्कि विदेशी साम्राज्य की लूट से अपने लोगों को आज़ाद कराना और जल, जंगल, ज़मीन व संसाधनों पर जनता का साझा हक़ क़ायम करना था।
वे दोनों थे। भगत सिंह ने अपने जीवन की शुरुआत देश की आज़ादी के दीवाने देशभक्त के रूप में की। लेकिन अध्ययन और चिंतन के बाद उन्होंने 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' के मंच से स्पष्ट किया कि गोरे शासकों की जगह भूरे शोषकों का बैठ जाना असली आज़ादी नहीं है। उनका राष्ट्रवाद सीधे तौर पर किसान और मज़दूर के राज यानी समाजवाद से जुड़ा था।
दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद आमतौर पर देश की पहचान को पुराने धर्म, किसी ख़ास नस्ल या परंपरा से जोड़ता है और अल्पसंख्यकों को शक की निगाह से देखता है। इसके विपरीत, वामपंथी राष्ट्रवाद देश को उसके सभी मेहनतकश नागरिकों का साझा घर मानता है, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो, और प्रमुख उद्योगों व संसाधनों पर जनहित में सरकारी नियंत्रण चाहता है।
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मुफ़्त क्विज़ शुरू करें →ये उदाहरण सोचने में मदद के लिए आसान बनाकर लिखे गए हैं। इनका मक़सद किसी देश, पार्टी या लोगों की तारीफ़ या बुराई करना नहीं है।